HomeAntarvasna Ki Kahaniबुढ़ापे का कामसूत्र ठरक या कुछ और

बुढ़ापे का कामसूत्र ठरक या कुछ और

दोस्तों, आज मै आपको अपने बापू के बारे बताता हु | माँ तो मेरी बचपन मे ही
मर गयी थी, और मेरे बापू ने मेरी वजह से दूसरी शादी भी नहीं की | लेकिन
मेरा बापू बहुत बड़ा ठरकी था | जब वो ४० साल का था; वो एक
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हट्ताकत्ता आदमी
था और उसकी छोटी सी राशन की दुकान खोल रखी थी | दूकान पर बैठे-बैठे उसका
मस्ताना लंड हमेशा झटके ही मारता रहता था वो अपनी दुकान पर आने वाली
औरतो को देखकर और उनके साथ सेक्स को सपने मे देखकर दूकान के कोने मे मुठ
मारा करता था | लेकिन, उस सब से उसकी ठरक नहीं मिटती थी, तो वो घर मे काम
करने वाली बाई को अपनी हवस का शिकार बनता था | वो सबसे ज्यादा पैसे देता
था, तो कोई भी बाई उसको मना नहीं करती थे | लेकिन, कोई भी बाई १-२ महीने से
ज्यादा नहीं टिकती थी | क्योकि, वो किसी भी समय घर पहुच जाता और बाई को
चोदने लगता और वो किसी के लिए भी मुमकिन नहीं था |इस बार काफी समय हो गया
था हमारी पुरानी बाई को काम छोड़े हुए | मेरे बाप तब से तड़प रहा था | मैने
उसे कितनी ही बार पड़ोस वाली आंटी को देखकर मुठ मारते हुए देखा था |
लेकिन, उसकी किस्मत जल्दी ही खुल गयी | एक दिन मेरा बाप दुकान पर बैठा हुआ
था और बुद्धू सा दिखने वाला मरियल नौजवान उस के पास आया और उसने मेरे बाप
के लिए पुछा | फिर उसने मेरे बाप को अपना नाम बताया और उसे मेरे मामा की
चिट्ठी दी | मैने मामा ने उसे और उसकी घरवाली को नौकरी के लिए भेजा था |
मेरे बाप ने एक उचटती हुई नज़र उस पर डाली और कहा तेरी घरवाली कहाँ है ? उस
आदमी ने कहा, कि बीवी को वो स्टेशन पर छोड़ कर आया है | अगर आप हां कहे,
तो मै उसे लेकर आता हुआ | मेरे बाप ने उसे डांटा और तुरंत उसकी घरवाली को
लाने को कहा | मेरा बाप मन ही मन अपनी किस्मत पर खुश हो रहा था | जब वो
आदमी लौटा, तो उस के पीछे पीछे एक मैली सी साड़ी पहने एक लड़की ठुमकती हुई
चली आ रही थी | मेरे बाप की पारखी आँखों ने अंदाजा लगाया; कि, उसकी उम्र
२२-२३ साल होगी और उसका शरीर बहुत कसा हुआ हुआ | मेरे बाप उसके चूचो के
बारे सोचने लगा और उसकी लार टपकने लगी |मेरा बाप उसकी सूरत नहीं देख पा रहा
था, क्योकि, उसने सर पर घूँघट डाला हुआ था | मेरे बाप ने उस आदमी को आँखों
से इशारा किया, तो उसने अपनी बीवी को घूँघट हटाने के लिए बोला | अपने मरद
की बात मानकर उसने अपना घूँघट झिझकते हुए खोला; तो मेरे बाप का मुँह खुला
ही रह गया | क्या सुंदर लड़की थी वो, एक दम काम की देवी | “बड़ी बड़ी काली
नशीली आँखें, तीखा नाक, उभरे गाल,सुर्ख होंठ,लंबी गर्दन,बड़ी बड़ी
चुंचियां,कासी हुई क़मर, भरी भरी टाँगे” सब कुछ बड़ा मस्त था | ऐसी मदहोश
औरत मेरे बाप ने आजतक नही देखी थी | उस लड़की के चेहरे पर मुस्कान थी और वह
मेरे बाप को घुर रही थी | मेरा बाप तो उसके घूरने से फ़िदा हो गया था और
अपनी वासना मे डूबी नजर से उस औरत के शरीर को भेदने लगा | मेरा बाप पुराना
खिलाडी था | उस ने तुरंत भांप लिया की वो लड़की खेली खायी औरत हैं और वो
उसे आसानी से पटा सकता है | ये सब सोचकर वो उस लड़की को घूरने लगा | वो
लड़की भी उसकी नजर भांप गयी थी और जवाब मे वह भी मुस्कुरा दी | मेरे बाप का
काम काफी आसान हो गया था |मेरा बाप तुरंत उन् को दोनो को घर ले गया और उस
औरत को घर का सारा काम समझा दिया और उस लड़के को लेकर दूकान वापस आ गया |
मेरे बाप को ये बाद हज़म नहीं हो रही थी; कि इतनी मस्त लड़की इस मरियल के
पल्ले कैसे पड़ गयी | वो आदमी भोला भला था.और कुछ ही देर मे उस से सब कुछ
सच उगलवा दिया | वो आदमी सिर्फ नाम का ही मर्द था | उसको मर्द और औरत के
संबंधों के बारे मे ज्यादा जानकारी ना थी और कोई खास लगाव भी नही था | अपनी
बीवी को आजतक खुश नहीं कर पाया था | उसकी बीवी दुसरे कई मर्दों के साथ मजा
लेकर अपना काम चलती थी | उसकी बीवी के नाजायज संभंदो और बदनामी के कारण उस
लड़के ने माँ ने उन्दोनो को यहाँ भेजा था | वो लड़की कामसूत्र इस खेल की
पुरानी खिलाडी थी और वो १३ की उमर से ही अपने को चुदवा चुद्वा रही थी.वह
अपने माँ के साथ खेतों मे काम पर जाती थी और वहा पर दुसरे लोगो से अपने को
चुदवाती थी | शुरू मै पैसों की तंगी की वजह से वो चुदवाती थी; लेकिन, बाद
मै उसकी चूत की खुजली ने उसे लंडो का दीवाना बना दिया | इस कारण से उसकी
बदनामी होने लगी थी और कोई भी मर्द उसका हाथ थामने को तैयार नहीं था; तो
उसकी माँ ने उसका दामन उस आदमी के साथ बांध दिया | उस औरत को सुहागरात मे
ही पता चल गया था की उसका पति किसी काम का नही था और उसकी लाख कोशिशों के
बावजूद उसका पति उसकी प्यास नहीं बुझा पाया | उसने अपने पति के लंड को
हस्थ्मथुन करके खड़ा करने की कोशिश की; लेकिन सब बेकार हो गया | इस कारण से
उसने बाहर मुह मरना नहीं छोड़ा और वो अपने पति के घर मे खुल्म्खुला चुवाने
लगी | तभी वो लोग अपना शहर छोड़कर यहाँ आ गये |उस औरत को मेरा बाप पसंद आ
गया था | क्योकि, मेरे बाप के पास रहने के मकान, अच्छे कपडे और पैसे मिल
सकते थे | उसने उसके साथ अपने नाजायद संभंदो के बनाने का मन बना लिया |
मेरा बाप तो पहले से ही फ़िदा था | शाम को मेरे बाप ने दोनों के लिए नए
कपडे लिए और कुछ मिठाई ली | जब उसने नए कपडे उस औरत को दिये तो वो बहुत खुश
हो गयी और उसने रात को मेरे बाप को मस्त खाना खिलाया | उसने नए कपडे पहने
और मेरे बाप को रिझाने लगी | उसके पति को मेरे बाप मे रात मे गोदाम की
रखवाली करने भेज दिया और मैने भी खाने के बाद अपने कमरे मे चला गया | मेरे
बाप ने रात को उस औरत को अपने कमरे मे बुलाया और अपने पैर दबाने के लिए कहा
| वो औरत भी मस्त थी | बापू के लंड तक उसका हाथ जाता था और वही लौट आता था
| इस हरकत से बापू का लंड मचलने लगा और उसके लंड ने खड़ा होने शुरू कर
दिया | फिर, मेरे बापू ने बेशर्मी से कहा, मेरे लंड मे काफी दर्द दे, उसका
दर्द दूर कर दे | उस औरत को मेरे बाप का लंड पसंद आ गया थे और उसने झट से
बापू की लुंगी बापू के शरीर से उतार दी और उसके लंड को मुह मे ले लिया और
चूसने लगी | बापू को मज़ा आना शुरू हो गया और बापू ने उसके सारे कपडे उतार
दिये और उसके चूहों को मसलने लगा |फिर, बापू ने उसके चूचो को अपने मुह मे
लगा लिया और उसकी सिसकिया शुरू हो गयी | मुझे ये सब आवाज़ आयी, तो मै
रासलीला के बारे मे समझ गया | फिर, बापू ने उस औरत को लिया दिया और उसकी
चूत को चूसने लगा और वो बापू का लंड | दोने के कामलीला ने मेरा लंड खड़ा कर
दिया और मैने मुठ मरना शुरू कर दिया | फिर, मैने बाप ने उसे पलंग पे
लिटाया और उसकी चूत मे अपना लंड घुसा दिया और उसे चोदने लगी | वो भी, अपनी
गांड हिलाहिला कर बापू का लंड अन्दर लेने लगी | कुछ ही झटको के बाद दोनों
निढाल होकर गिर पड़े और मेरा बापू उसके शरीर को चूसने लगा |
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पूरी रात के
कार्यक्रम के बाद बापू सुबह बहुत खुश था |अब उसने घर पर ज्यादा समय देना
शुरू कर दिया और उस आदमी को अधिकतर घर से दूर ही रखता | उस औरत ने ने मेरे
बापू का दिल जीत लिया था और उसकी चुदाई के कारण मेरे बाप ने सब कुछ उस पर
न्योछावर कर दिया |

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